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Coronavirus: Insurance Regulator issues Guidelines for COVID-19 Health Insurance Policies – हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां जल्द ही COVID-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी लाएंगी, शर्तों के साथ मिली मंजूरी

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हेल्थ इंश्योरेंस कंपनियां जल्द ही COVID-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी लाएंगी, शर्तों के साथ मिली मंजूरी

प्रतीकात्मक फोटो.

नई दिल्ली:

Coronavirus: स्वास्थ्य बीमा कंपनियां अब जल्दी ही कोरोना वायरस के लिए विशेष कोविड-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी लेकर आएंगी. इंश्योरेंस रेगुलेटर- इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने अपने ताज़ा आदेश में शर्तों के साथ इसकी मंज़ूरी दे दी है. कोविड-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी के तहत साढ़े तीन महीने, साढ़े छह  महीने और साढ़े नौ महीने तक के टर्म वाली पॉलिसी ऑफर की जा सकती हैं.  

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देश में बढ़ते कोरोना संकट की वजह से आम लोगों में असुरक्षा की भावना कम करने के लिए इंश्योरेंस रेगुलेटर- इंश्योरेंस रेगुलेटरी एंड डेवलपमेंट अथॉरिटी ने कोविड-19 के लिए विशेष हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी जारी करने की मंजूरी दे दी है. 

अथॉरिटी की तरफ से जारी आदेश में कहा गया है कि इंश्योरेंस रेगुलेटर के निर्देश के अनुसार सभी जनरल और हेल्थ इंश्योंरेंस कंपनियां कोविड-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी ऑफर कर सकते हैं. कोविड-19 स्टैंडर्ड हेल्थ पॉलिसी के तहत साढ़े तीन महीने, साढ़े छह महीने और साढ़े नौ महीने तक के टर्म वाली पॉलिसी ऑफर की जा सकती हैं.  इसके तहत कोविड-19 मरीज़ के हॉस्पिटलाइजेशन, होम केयर ट्रीटमेंट या आयुष ट्रीटमेंट पर होने वाला सभी तरह का खर्च शामिल होगा. पॉलिसी की कीमत उसके तहत दी जने वाली सुविधा के आधार पर इंश्योंरेंस कंपनियां तय करेंगी.

इससे पहले इंश्योरेंस रेगुलेटर ने 23 जून को निर्देश दिए थे कि COVID-19 के लिए शार्ट-टर्म  हेल्थ इंश्योंरेंस पॉलिसी को मंजूरी दी गई थी. COVID-19 के लिए तैयार विशेष शार्ट-टर्म हेल्थ पॉलिसी 3 महीने से 11 महीने तक के लिए हो सकती है. यह पॉलिसी कवर किसी व्यक्ति या ग्रुप को ऑफर किया जा सकता है.

उधर आम लोगों के साथ-साथ भारत सरकार भी हेल्थकेयर  पर खर्च बढ़ाए, इस अहम सवाल पर विचार शुरू हो गया है. प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार समिति के अध्यक्ष बिबेक देबरॉय ने सोमवार को इसके साफ़ संकेत दिए. बिबेक देबरॉय ने कहा कि कोविड-19 के कहर ने स्वास्थ्य पर खर्च के महत्व को रेखांकित किया है. स्वास्थ्य पर खर्च की क्षमता भी महत्वपूर्ण है. स्वास्थ्य पर सरकारी व्यय को फिर से प्राथमिकता देना है. स्वास्थ्य क्षेत्र पर व्यय का रिअलोकेशन भी करना है.


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