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Nepals parliament likely to pass New map today, Which includes Indian Territory – नेपाल की संसद ने भारतीय क्षेत्र को शामिल करने वाले नए नक्शे को किया पारित

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खास बातें

  • नए मानचित्र को पास कराने की तैयारी
  • भारत के तीन हिस्सों को नेपाल ने बताया अपना
  • नेपाल के नए नक्शे पर भारत जता चुका है आपत्ति

काठमांडू/नई दिल्ली, :

नेपाल की संसद में शनिवार को उस नए नक्शे को पारित कर दिया जिसमें भारतीय क्षेत्र को भी शामिल किया गया है.  मानचित्र को अपडेट करने के लिए एक संविधान संशोधन बिल पर मतदान करने के लिए विशेष सत्र आयोजित किया गया. सदन में 275 सदस्यों में से 258 सदस्य मौजूद थे और सभी ने नए नक्शे के पक्ष में वोट डाला. इसके विरोध में एक भी वोट नहीं डाला गया. संशोधित नक्शे में भारत की सीमा से लगे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण लिपुलेख, कालापानी और लिंपियाधुरा इलाकों पर दावा किया गया है. भारत इन तीन इलाकों को अपना बताता रहा है. नेपाली कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता पार्टी-नेपाल और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने नए विवादित नक्शे को शामिल करते हुए राष्ट्रीय प्रतीक को अद्यतन करने के लिये संविधान की तीसरी अनुसूची को संशोधित करने संबंधी सरकारी विधेयक के पक्ष में मतदान किया. देश के 275 सदस्यों वाले निचले सदन में विधेयक को पारित करने के लिये दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है. संसद ने नौ जून को आम सहमति से इस विधेयक के प्रस्ताव पर विचार करने पर सहमति जताई थी जिससे नए नक्शे को मंजूर किये जाने का रास्ता साफ हुआ.

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विधेयक को नेशनल असेंबली में भेजा जाएगा, जहां उसे एक बार फिर इसी प्रक्रिया से होकर गुजरना होगा. सत्ताधारी नेपाल कम्युनिस्ट पार्टी के पास नेशनल असेंबली में दो तिहाई बहुमत है. नेशनल असेंबली को विधेयक के प्रावधानों में संशोधन प्रस्ताव, अगर कोई हो तो, लाने के लिये सांसदों को 72 घंटे का वक्त देना होगा. नेशनल असेंबली से विधेयक के पारित होने के बाद इसे राष्ट्रपति की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा, जिसके बाद इसे संविधान में शामिल किया जाएगा.

सरकार ने बुधवार को विशेषज्ञों की एक नौ सदस्यीय समिति बनाई थी जो इलाके से संबंधित ऐतिहासिक तथ्य और साक्ष्यों को जुटाएगी. कूटनीतिज्ञों और विशेषज्ञों ने सरकार के इस कदम पर सवाल उठाते हुए हालांकि कहा कि नक्शे को जब मंत्रिमंडल ने पहले ही मंजूर कर जारी कर दिया है तो फिर विशेषज्ञों के इस कार्यबल का गठन किस लिये किया गया?

भारत और नेपाल के बीच रिश्तों में उस वक्त तनाव दिखा जब रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने आठ मई को उत्तराखंड में लिपुलेख दर्रे को धारचुला से जोड़ने वाली रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण 80 किलोमीटर लंबी सड़क का उद्घाटन किया. नेपाल ने इस सड़क के उद्घाटन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए दावा किया कि यह सड़क नेपाली क्षेत्र से होकर गुजरती है. भारत ने नेपाल के दावों को खारिज करते हुए दोहराया कि यह सड़क पूरी तरह उसके भूभाग में स्थित है. नेपाल ने पिछले महीने देश का संशोधित राजनीतिक और प्रशासनिक नक्शा जारी कर रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इन इलाकों पर अपना दावा बताया था. भारत यह कहता रहा है कि यह तीन इलाके उसके हैं. काठमांडू द्वारा नया नक्शा जारी करने पर भारत ने नेपाल से कड़े शब्दों में कहा था कि वह क्षेत्रीय दावों को “कृत्रिम रूप से बढ़ा-चढ़ाकर” पेश करने का प्रयास न करे.

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “हमने इन विषयों पर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट कर दी है. भारत नेपाल के साथ अपने सांस्कृतिक और दोस्ताना संबंधों को गहरी अहमियत देता है.” श्रीवास्तव ने कहा, “हमारी बहुआयामी द्विपक्षीय साझेदारी में हाल के वर्षों में विस्तार हुआ है और विविधता आई है. इसके साथ ही भारत की सहायता से मानवीय, विकास और संपर्क परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया गया है.”

इस सप्ताह की शुरुआत में नेपाली संसद ने एकमत से उस प्रस्ताव को समर्थन दिया था जिसके तहत संविधान संशोधन विधेयक द्वारा नए मानचित्र को स्वीकृति मिलनी है. 

इस बीच, नेपाल को लेकर आर्मी चीफ एमएम नरवणे ने शनिवार को सुबह कहा कि नेपाल के साथ हमारे संबंध मजबूत हैं. हमारे बीच भौगोलिक, सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक जुड़ाव है. हमारे लोगों के बीच आपसी संबंध (पीपुल टू पीपुल) बहुत मजबूत हैं. नेपाल के साथ हमारे संबंध हमेशा मजबूत रहे हैं और भविष्य में भी मजबूत रहेंगे.  

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