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Bihar Nurses Of Sub-Divisional Hospital Bagaha Corona Kit News ANN

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पटना: बिहार के बगहा में सुरक्षा किट की कालाबाजारी से स्वास्थ्यकर्मियों की जिंदगी संकट में है. जहां एक तरफ कोरोना वायरस से बचाव के लिए स्वास्थ्यकर्मी जी-जान से जुटे हैं, वहीं दूसरी तरफ बिहार के बगहा में स्वास्थ्यकर्मियों को मिलने वाला सुरक्षा किट कालाबाजारी की भेंट चढ़ जा रहा है.

जिले के अनुमंडल अस्पताल में आज नर्सों ने खूब हंगामा किया. उनका आरोप है कि अस्पताल में पदस्थापित स्टोर इंचार्ज अनिल सिंह सरकार की तरफ से मिल रहे मास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स आदि की कालाबाजारी कर रहे हैं. नर्सों ने इस दौरान बताया कि पिछले कई दिनों से अस्पताल की तरफ से उन्हें सुरक्षा किट नहीं मिल रहा है. इसके चलते वे डर के माहौल में काम करने को मजबूर हैं. सुरक्षा किट के अभाव उन्हें भी कोरोना वायरस से संक्रमण का खतरा लगा रहता है.

स्वास्थयकर्मी निर्मला कुमारी ने कहा कि हमलोगों को स्टोर कीपर अनिल सिंह सैनिटाइजर  और ग्लव्स मुहैया नहीं कराते हैं. अस्पताल में आने पर सैनिटाइजर और ग्लव्स बेच देते हैं. हमलोग ये सारी चीजें मरीजों के परिजनों से खरीद कर मंगाते हैं  या खुद के पैसे से खरीदकर काम चलाते हैं. उन्होंने कहा कि वरीय अधिकारी से शिकायत करने पर वे कहते हैं कि स्टोर कीपर से कहिए.

वहीं इस पूरे मामले पर स्टोर कीपर अनिल सिंह का कहना है कि सैनिटाइजर आदि चीजें सीमित मात्रा में मिलती हैं. नर्स और एएनम को दिया भी जाता है. लेकिन वे लोग इसे घर लेकर भी चली जाती हैं, जिसके चलते समस्या हो रही है. हंगामा कर रहीं नर्सों ने इस पूरे मामले में अस्पताल प्रबंधन पर भी मिलीभगत का आरोप लगाया है.

राज्य के तीन बड़े अस्पताल पीएमसीएच, एनएमसीएच और एम्स पूरी तरह से कोरोना मरीजों के लिए समर्पित हैं. इन सभी अस्पतालों में आइएएस-आईपीएस अफसरों की तैनाती की गई है जिससे बीमारी के इलाज में किसी प्रकार की कोताही न बरती जाए.

यहीं नहीं सरकार के दिशानिर्देशों पर राजधानी पटना में कई प्राइवेट अस्पताल भी कोरोना मरीजों के लिए अलग बेड की सुविधा शुरू करने लगे हैं. फिर भी राज्य की बड़ी जनसंख्या के आगे ये सारे प्रयास नाकाफी साबित हो रहे हैं. ऐसे में मास्क, सैनिटाइजर और ग्लव्स आदि सुरक्षा संबंधित किट की कालाबाजारी इन सभी प्रयासों पर पानी फेरने के लिए काफी है.

पूरे राज्य में कोरोना का संक्रमण तेजी से फैल रहा है. इसको देखते हुए राज्य सरकार ने राज्यव्यापी लॉकडाउन की घोषणा की है. राज्य में कुल संक्रमितों का आंकड़ा 30 हजार से ज्यादा हो चुका है. संक्रमण की रफ्तार का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शुरूआती 10 हजार केस आने में 102 दिनों का वक्त लगा था जबकि अगले 10 हजार केस आने में 14 दिन लगे. इससे भी डरावना आंकड़ा यह है कि अगले 10 हजार केस महज 7 दिनों में ही आ गए. चंद दिन पहले ही संक्रमण से पीएमसीएच में पदस्थापित एक डॉक्टर ने ही दम तोड़ दिया था. पूरे प्रदेश में अबतक कोरोना ने  200 से ज्यादा लोगों की जीवन लीला समाप्त कर दी. ऐसे समय में स्वास्थ्यकर्मियों को पर्याप्त संसाधन उपलब्ध नहीं होते हैं, तो स्थिति और भयावह होती चली जाएगी.

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