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Law against triple talaq strengthened self-reliance among Muslim women: Naqvi – वोट बैंक के सौदागरों ने ट्रिपल तलाक को राजनीतिक संरक्षण दिया था: केंद्रीय मंत्री नकवी

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'वोट बैंक के सौदागरों' ने ट्रिपल तलाक को राजनीतिक संरक्षण दिया था: केंद्रीय मंत्री नकवी

मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्‍शन ऑफ राइट्स ऑफ मैरिज) एक्‍ट 2019 की पहली वर्षगांठ पर कार्यक्रम आयोजित किया गया

खास बातें

  • कहा-एक्‍ट लागू होने से ट्रिपल तलाक मामले काफी कम हुए
  • वीडियो कॉन्‍फ्रेंस के माध्यम से मुस्लिम महिलाओं को संबोधित किया
  • कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद और स्‍मृति ईरानी भी मौजूद थे

नई दिल्ली:

अल्पसंख्यक मामलों के मुख्तार अब्बास नकवी (Minority Affairs Minister Mukhtar Abbas Naqvi) ने कहा है कि ट्रिपल तलाक (Triple talaq) को “वोट बैंक के सौदागरों” की ओर से राजनीतिक संरक्षण दिया गया था और यह नरेंद्र मोदी सरकार थी जिसने इसे क्रिमिनल अफेंस बनाया और मुस्लिम महिलाओं के आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास को बढ़ाया. उन्‍होंने यह बात मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्‍शन ऑफ राइट्स ऑफ मैरिज) एक्‍ट 2019 की पहली वर्षगांठ के मौके पर आज वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के माध्यम से देशभर से आई मुस्लिम महिलाओं (Muslim women) को संबोधित करते हुए कही. केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि इस एक्‍ट के लागू होने के बाद, ट्रिपल तालक के मामलों में भारी कमी आई है.

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नकवी ने कहा कि मोदी सरकार “राजनीतिक शोषण” के लिए नहीं बल्कि राजनीतिक सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद (Ravi Shankar Prasad) और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी (Smriti Irani) ने भी इस अवसर पर मुस्लिम महिलाओं को संबोधित किया.नकवी ने कहा कि 1 अगस्त वह दिन है जिस दिन मुस्लिम महिलाओं को ट्रिपल तलाक की सामाजिक बुराई से मुक्त किया गया था और इसे देश के इतिहास में “मुस्लिम महिला अधिकार दिवस” ​​के रूप में दर्ज किया गया है. कांग्रेस पार्टी पर निशाना साधते हुए उन्‍होंने कहा कि ट्रिपल तलाक या  तलाक-ए-बिद्दतन न तो इस्लामी है और न ही कानूनी” था, लेकिन इसके बावजूद इस सामाजिक बुराई को वोट बैंक की खातिर राजनीतिक संरक्षण प्रदान किया गया. ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून 1980 में ही पारित किया जा सकता था जब सुप्रीम कोर्ट ने शाहबानो मामले में ऐतिहासिक फैसला दिया था.

उन्‍होंने कहा, “कांग्रेस के पास उस समय 545 लोकसभा सदस्यों में से 400 से अधिक और राज्यसभा में 245 सदस्यों में से 159 के साथ संसद में पूर्ण बहुमत था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए तत्कालीन राजीव गांधी सरकार ने संसद में अपनी ताकत का इस्तेमाल किया और मुस्लिम महिलाओं को उनके संवैधानिक और मौलिक अधिकारों से वंचित कर दिया गया.” उन्होंने कहा कि दूसरी ओर, मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को प्रभावी बनाने के लिए ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून बनाया. नकवी ने कहा, “ट्रिपल तलाक के खिलाफ कानून पारित किए हुए एक साल हो गया है और उसके बाद ऐसे मामलों में लगभग 82 प्रतिशत तक की गिरावट आई है. यदि इस तरह का कोई मामला दर्ज किया गया तो कानून के तहत कार्रवाई की गई है.”

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(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)


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