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UGC Guidelines To Be Released Today Possible Effect On Universities And Colleges

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UGC Guidelines To Be Released Today: यूनिवर्सिटी ग्रांट्स कमीशन संभवतः आज गाइडलाइंस जारी करेगा, जिसके आधार पर इस एकेडमिक सेशन से लेकर पेंडिंग परीक्षाओं तक के बारे में निर्णय लिया जा सकेगा. इस साल कोरोना की वजह से शिक्षा से जुड़ा हर छोटा-बड़ा पहलू प्रभावित है. फिर चाहे वो पेंडिंग परीक्षाएं हों, नये सेशन की शुरुआत हो या रिजल्ट की घोषणा. कहीं बार-बार एग्जाम पोस्टपोन किए जा रहे हैं, कहीं ओपेन बुक एग्जाम कंडक्ट हो रहे हैं. हालांकि कोई भी कॉलेज या यूनिवर्सिटी अंतिम निर्णय के पहले यूजीसी की गाइडलाइंस आने का इंतजार कर रहे हैं. चूंकि अथॉरिटी बॉडी यूजीसी ही है इसलिए सबको उसी के अनुसार चलना है. यूजीसी द्वारा जारी की जा रही इन गाइडलाइंस को लागू करते समय कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ को अपने स्तर पर भी चीज़ों को देखना होगा. दरअसल हर यूनिवर्सिटी के अपने तरीके अपना सेशन कंडक्ट कराने का तरीका होता है. ऐसे में वे हर नियम को ठीक उसी रूप में कितना फॉलो कर पाते हैं, ये देखने वाला होगा.

कुछ दिनों पहले भी आयी थी गाइडलाइंस –

कुछ दिनों पहले भी यूजीसी की गाइडलाइंस आयी थी जिनमें केवल फाइनल ईयर की परीक्षा करवाने और बाकी वर्ष के स्टूडेंट्स को इंटर्नल ऐसेसमेंट के आधार पर प्रमोट करने की बात कही गयी थी. यही नहीं पुराने स्टूडेंट्स के लिए नये सेशन की शुरुआत 1 अगस्त से और नये स्टूडेंट्स के लिए नए सेशन की शुरुआत 1 सितंबर से करने की योजना बनी थी. इस स्टेटमेंट के आने के बाद भी कइ जगहों पर बात बनी नहीं क्योंकि केवल फाइनल ईयर की परीक्षाओं को कंडक्ट कराने वाली बात भी बहुत से स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स को नगावर गुज़री. कोरोना के खतरे को देखते हुए बहुत से स्टूडेंट्स परीक्षा देने को तैयार नहीं दिखे. पंजाब जैसे राज्य में परीक्षाएं 15 जुलाई तक के लिए पोस्टपोन कर दी गयीं. दिल्ली में ओपेन बुक एग्जाम भी टालने पड़े.

कोरोना ने दिया है मौका –

यूजीसी की गाइडलाइंस आने के बाद ही स्थितियां पूरी तरह साफ होंगी पर एक बात तो पक्की है कि उनके द्वारा जारी की गई गाइडलाइंस का पूरी तरह पालन करने में बहुत से कॉलेजेस और यूनिवर्सिटीज़ को खुद को अपग्रेड करना होगा. इस बारे में बात करते हुए वीएसएसडी कॉलेज के एसोसिएट प्रोफेसर मनोज अवस्थी कहते हैं, कि कई बार जब ऑनलाइन क्लासेस कराने की बात आयी तो कई कॉलेज और यूनिवर्सिटी इसके लिए पूरी तरह तैयार नहीं थे. यूं तो कोरोना का कोई भी पॉजिटिव आस्पेक्ट नहीं है पर इस स्थिति के बनने से कॉलेजेस भविष्य में इस तरह की कंडीशंस को हैंडल करने के लिए खुद को इक्विपड कर पाएंगे. यह समय खुद को टेक्नोलॉजिकली अपग्रेड करने का है. हालांकि ऑनलाइन क्लासेस कभी भी रियल क्लासेस की जगह नहीं ले सकती पर जब तक कोई विकल्प नहीं है तब तक स्टूडेंट्स का साल बर्बाद न हो इसके लिए इनका सहारा लिया जा सकता है. ये मौका है कि कॉलेज और यूनिवर्सिटी आने वाले समय के लिए खुद को तैयार कर सकते हैं.

राहत मिलेगी या बढ़ेगी चुनौती –

यूं तो गाइडलाइंस जारी होने के बाद स्थितियां साफ हो जाएंगी लेकिन सभी के लिए इन्हें लागू करना कितना संभव होगा, यह समय ही बताएगा. किस राज्य में कोरोना की स्थिति क्या है, किसकी परीक्षाएं हो चुकी हैं, किसकी थोड़ी सी बाकी हैं, कहां के स्टूडेंट्स परीक्षा कराने का विरोध करते हैं या कहां के इंटर्नल एसेसमेंट पर राजी होते हैं यह सब भी बिंदु कॉलेजेस को देखने होंगे. ऑनलाइन रिजल्ट डिक्लेयर करने से लेकर ऑनलाइन परीक्षाएं कराने तक के संसाधन किसके पास हैं ये भी देखना होगा. शहर और सुविधाओं का स्तर स्टूडेंट्स के लेवल पर भी देखना होगा. हर जगह के स्टूडेंट्स ऑनलाइन क्लासेस एक्सेस नहीं कर सकते. ऐसा ही मुद्दा फीस का भी है. खैर कुछ समय में यूजीसी की गाइडलाइंस आ जाने के बाद कॉलेज और यूनिवर्सिटीज़ को कितनी राहत मिलती है या कितनी चुनौती, यह साफ हो जाएगा.

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