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Delhi : Doctors cure 105-year-old Coronavirus infected woman – डॉक्टरों ने 105 साल की कोरोना वायरस संक्रमित महिला को ठीक करके उनके परिवार को दी ईदी

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डॉक्टरों ने 105 साल की कोरोना वायरस संक्रमित महिला को ठीक करके उनके परिवार को दी 'ईदी'

दिल्ली में 105 साल की बुजुर्ग अफगानी महिला राबिया अहमद ने कोरोना वायरस को मात दे दी. उन्हें अस्पताल से विदा किया गया.

नई दिल्ली:

दिल्ली (Delhi) में एक 105 साल की बुजुर्ग अफगानी महिला कोरोना वायरस (Coronavirus) को मात देने में सफल हो गई हैं. एक सप्ताह तक वेंटीलेटर पर रहने के बाद महिला पूरी तरह से स्वस्थ हो गई. उनको अस्पताल से छुट्टी मिल गई है. इस मौके पर उनके परिवार के लोगों ने डॉक्टरों को धन्यवाद दिया. डॉक्टरों ने बुजुर्ग महिला को ईद से पहले ठीक करके उनके परिवार को ईदी दे दी. बुजुर्ग महिला शारदा हॉस्पिटल में भर्ती थीं. 

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दिल्ली के शारदा अस्पताल के डॉक्टरों ने सात दिन से वेंटिलेटर पर जिंदगी के लिए जंग लड़ने वाली कोरोना संक्रमित 105 साल की बुजुर्ग अफगानिस्तानी महिला को नया जीवन दिया है. डॉक्टरों की विशेष निगरानी और देखभाल की वजह से वह अब पूरी तरह ठीक हैं. उन्होंने और उनके परिवार वालों ने शारदा अस्पताल के डॉक्टरों और स्टाफ के सदस्यों को धन्यवाद कहा. पीड़िता के पोते ने कहा कि डॉक्टरों ने उनके परिवार को बकरीद से पहले ईदी दे दी है. शुक्रवार को राबिया के डिस्चार्ज के समय अपर जिलाधिकारी दिवाकर सिंह, अपर मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ वीके सिंह ने महिला को गिफ्ट देकर शुभकामनाएं दीं. 

शारदा अस्पताल के प्रवक्ता अजित कुमार  ने बताया कि नोएडा के निजी अस्पताल में जांच के बाद कोरोना संक्रमित अफगानिस्तान की रहने वाली 105 साल की राबिया अहमद को 16 जुलाई को शारदा में एडमिट किया गया. जब मरीज को लाया गया उस समय उनको बुखार, सांस लेने में गंभीर तकलीफ के अलावा निमोनिया की शिकायत थी. वह अलजाइमर से भी ग्रसित हैं. जब उनको यहां भर्ती किया गया तो वह किसी रिश्तेदार को पहचान नहीं रही थीं. जांच में पेशाब में इन्फेक्शन और ईसीजी भी नार्मल नहीं था. उनको एक्यूट रिस्पाइरेटरी ड्रिसट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस) की चपेट में आने पर तत्काल गंभीर अवस्था में वेंटीलेटर पर शिफ्ट किया गया. आईसीएमआर और शारदा के प्रोटोकाल के तहत इलाज शुरू किया गया. सात दिनों तक वेंटिलेटर सपोर्ट के बाद उनकी हालत में सुधार आने लगा. उन्हें हाई लेवल प्रोटीन युक्त डाइट दी गई. इसके बाद उनको वेंटीलेटर से शिफ्ट कर दिया गया. इलाज का असर होते ही उन्होंने आईसीयू में स्टाफ को पहचानना शुरू कर दिया. अब उनकी हालत काफी बेहतर है. वह ठीक से खाना पीना भी ले रही हैं. 30 जुलाई को कोरोना की रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद 31 जुलाई को उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया. 

डॉक्टर और  पैरा मेडिकल टीम के अथक प्रयास का नतीजा रहा कि मरीज 15 दिन बाद ठीक होकर अपने घर गई. डिस्चार्ज के समय मेडिकल स्टाफ ने फूल देकर महिला को विदा किया. बता दें कि राबिया की पोती ने  शारदा यूनिवर्सिटी से ही बीडीएस का कोर्स किया है. घर जाने के समय राबिया ने अस्पताल के स्टाफ को धन्यवाद देते हुए कहा कि पूरी टीम ने उनकी प्रॉपर देखभाल की. इससे उनमें काफी तेजी से सुधार हुआ. यहां के डॉक्टर और स्टाफ की बदौलत वह इतने कम समय में स्वस्थ हो सकीं.

महिला को लेने आए उनके पोते अहमद फवाद ने कहा कि बकरीद से पहले अस्पताल ने उन्हें ताउम्र न भूलने वाला गिफ्ट दिया है. दादी को देखकर उनकी आंखें भर आईं. उन्होंने कहा कि अब घर में सभी एक साथ ईद उल जुहा की नमाज पढ़ेंगे और ईद मनाएंगे.


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