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PM Modi said – As far as possible, children of 5th grade should be taught in their mother tongue – PM मोदी बोले – जहां तक संभव हो, 5वीं कक्षा के बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाना चाहिए

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PM मोदी बोले - जहां तक संभव हो, 5वीं कक्षा के बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाना चाहिए

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) – फाइल फोटो

नई दिल्ली:

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) पर आयोजित एक ई-कॉन्क्लेव को संबोधित किया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) ने कहा है कि जहां तक संभव हो, पांचवीं कक्षा के बच्चों को उनकी मातृभाषा में पढ़ाया जाना चाहिए. नयी शिक्षा नीति के प्रावधानों का समर्थन करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से ये बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पक्षपात है, या किसी एक ओर झुकी हुई है.

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पीएम मोदी ने कहा, “इस बात में कोई विवाद नहीं है कि बच्चों के घर की बोली और स्कूल में पढ़ाई की भाषा एक ही होने से बच्चों के सीखने की गति बेहतर होती है. यह एक बहुत बड़ी वजह है जिसकी वजह से जहां तक संभव हो, पांचवी कक्षा तक, बच्चों को उनकी मातृभाषा में ही पढ़ाने पर सहमति दी गई है. इससे बच्चों की नींव तो मजबूत होगी ही, उनकी आगे की पढ़ाई के लिए भी उनका बेस और मजबूत होगा.” पांचवी कक्षा तक के बच्चों को उनकी मातृभाषा या क्षेत्रीय भाषा में पढ़ाने को लेकर नई शिक्षा नीति के प्रावधान पर प्रधानमंत्री ने यह बात कही.

प्रधानमंत्री मोदी (PM Modi) का बयान ऐसे समय पर आया है जब तमिलनाडु सरकार ने 3-लैंग्वेज फार्मूला को रिजेक्ट करते हुए इस प्रावधान को राज्य में लागू करने से इनकार कर दिया है. प्रधानमंत्री ने कहा, ”अब सरकार का ध्यान इस नई नीति को लागू करने पर है.”

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उन्होंने कहा, ”राष्ट्रीय शिक्षा नीति आने के बाद देश के किसी भी क्षेत्र से, किसी भी वर्ग से यह बात नहीं उठी कि इसमें किसी तरह का पक्षपात है, या किसी एक ओर झुकी हुई है. अब सबकी निगाहें इसके कार्यान्वयन की तरफ हैं. इस चैलेंज को देखते हुए, व्यवस्थाओं को बनाने में जहां कहीं कुछ सुधार की आवश्यकता है, वो हमें सबको मिलकर ही करना है और करना ही है.”

अब मोदी सरकार के सामने अगली बड़ी चुनौती नई शिक्षा निति को ज़मीनी स्तर तक सही तरीके से लागू करने की होगी. एक नया कानून हायर एजुकेशन कमीशन बिल पर राजनितिक सहमति जुटानी होगी और साथ ही कुछ कानून भी संशोधन भी करने पड़ेंगे.


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